Friday, April 27, 2007

प्लस्टिक का कचरा कब तक चलेगा?


@gyandutt I'm reading: प्लस्टिक का कचरा कब तक चलेगा?Tweet this (ट्वीट करें)!

"इकनामिस्ट" में है कि सेनफ्रंसिसको में प्लास्टिक के शॉपिंग बैग पर पाबन्दी लग गयी है. किराना वालों ने इस का विरोध किया है. पर कानून बनाने वालों ने सुनी नहीं. पता नहीं कैसे कानून बनाने वाले हैं वहां. हमारे यहां तो जनता के बिना बोले बहुत कुछ सुन लेते हैं. खैर.

प्लास्टिक का कचरा वास्तव में जिन्दगी तबाह कर रहा है. एक महीना हार्लिक्स और डाबर का च्यवनप्राश सेहत बनाता है पर उनकी बोतल हमारे आगे की सौ पीढ़ियां झेलेंगी. रिसाइकल्ड प्लास्टिक न जाने कौन कौन से स्वास्थ्य नाशक तत्व लिये रहता है. आपमें लम्बा लेख पढ़ने की पेशेंस हो तो बेस्टलाइफ मैगजीन में यह लेख पढ़ें. प्लास्टिक अब भोजन कि चेन को भी प्रदूषित कर रहा है। गायें प्लास्टिक का कचरा खाते देखी जा सकती हैं। पक्षी, समुद्री जीव, मछलियाँ - ये सब प्लास्टिक की चपेट में हैं। वहा दिन दूर नहीं जब मानव शरीर में प्लास्टिक प्रवेश कर जायेगा - या कर ही चुका है। प्लास्टिक कि बोतल से दूध पीते नवजात के दिमाग, प्रतिरोधक क्षमता और प्रजनन अंगों पर प्रभाव पड़ रहा है। केंसर और डायबिटीज के मामले प्लास्टिक प्रदूषण से बढ़ रहे हैं. लेख बड़ी भयानक तस्वीर सामने रखता है।

ड़ेढ़ सौ साल से बने प्लास्टिक का एक छोटा सा हिस्सा ही नष्ट हुआ है. हर साल 60,000,000,000 टन प्लास्टिक बनता है. उसमें से ज्यादातर तो केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जाता है. अपने मजे के लिये हम धरती और समन्दर दोनों को कब्रिस्तान बना दे रहे हैं.

एक बड़ी खोज वह होगी जो प्लास्टिक के बायोडिग्रेडेबल बनाने के बारे में होगी. खोजने या उसको कमर्शियल रूप देने वाला बिल गेट्स जैसा धनी बन जायेगा और आगे आने वाली पीढ़ियां उसका गुण गान करेंगी.

तब तक हम क्या करें? घर में तो हमने नियम बना लिया है बाजार जायेंगे तो अपना थैला लेकर जायेंगे. दुकानदार को विनम्रता से मना कर देते हैं कि भैया, आपका कैरी बैग नहीं चाहिये। पर यह तो मात्र आत्मसंतोष के लिए है। समस्या का समाधान तो नहीं है।

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हमारे एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, उनका कहना है कि जब वे नार्थ फ्रंटियर रेलवे में असम में पोस्टेड थे तो उनके एक प्लास्टिक के थैले को (जिसमें किताबें थीं) दीमक पूरी तरह चट कर गयीं थीं - थैले समेतप्लास्टिक को बायो डीग्रेडेबल करने के लिए उस दीमक की खोज की जा सकती है

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प्रतिक्रियायें :
 

4 महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

Mired Mirage said...

यह समस्या बेहद गम्भीर है । इससे निपटने के लिये हमें व अन्य लोगों को निश्चय करना होगा कि आज के थोड़े से सुख सुविधा के लिये आने वाली पीढ़ियों का जीवन नर्क बनाना गलत व अनतिक है । जितना आप कर रहे हैं उतना ही मैं भी कर रही हूँ , किन्तु यह बहुत कम है ।
घुघूती बासूती

rinku said...

यह तो एक बहुत बडी समस्या है..भाई आप तो कैरी बेग लेने से मना कर दिये पर हमने तो ऐसे लोगो को देखा है की एक प्लास्टिक बेग से काम नही चलाता है वे दुकानदार को बोलकर एक और बेग लेते है जैसे की उसका आचार डालेंगे...

राजीव said...

मैं तो कई वर्षों से इनका सीमित प्रयोग ही करता हूँ, कभी कभी, जब बिलकुल नये थैले की आवश्यकता न हो तो पहले वाले को ही प्रयोग में लाता हूँ, औरों से भी कई बार कहा, पर किसी पर असर होते नहीँ देखा।

Hariraam said...

तब तक चलेगा, जबतक इसका कोई अधिक सस्ता और सुलभ विकल्प नहीं निकलता। आप कुछ निकालिए न!

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