Tuesday, May 15, 2007

कौन से “स्पैमर” से डर लगता है जी?

हरिराम जी से विनम्र निवेदन किया कि वे वर्ड-वेरीफिकेशन वाला चक्कर बंद करवा दें अपने चिठ्ठे पर. पचास की उम्र के बाद अंग्रेजी के आड़े-तिरछे शब्द पढ़ उसे टाइप करना आंखों पर जोर डालता है. पर उन्होने नजर अन्दाज कर दिया.

वैसे भी हिन्दी में टिपेरना कठिन काम है. रोमन में करें तो उड़न तश्तरी वाला आप गदहा लेखक हैं... जैसा कंफ्यूजन का खतरा होता है. प्योर अंग्रेजी में टिपेरने पर अमित (बच के रहना रे!) और ई-पण्डित से इमोशनल रार मोल लेनी होती है. ऊपर से वर्ड-वैरीफिकेशन की वैतरणी पार करना... बड़ा ही झमेला है टिप्पणी करना! केवल समीर लाल और घुघूती बासूती जी जैसे ही हैं जो सारी विघ्न-बाधाओं के बावजूद भी सरल/सटीक टिप्पणी किये मिलते हैं. कभी-कभी तो लगता है कि चिठेरा चिठ्ठा बाद में लिखता है, उसके मनोभाव पढ कर समीर लाल जी की उड़न तश्तरी टिप्पणी पहले कर देती है. खैर, यह तो विषयांतर हो गया.

मुद्दे की बात यह है कि ये वर्ड-वेरीफिकेशन काहे को? हिन्दी में कौन स्पैमर है जो आपके चिठ्ठे पर कम्प्यूटर जेनरेटेड गन्द उंडेलने को तत्पर है? क्या किसी सज्जन ने स्पैमर देखा अपने हिन्दी चिठ्ठे पर? (अगर यह समस्या हो यो कृपया ज्ञान वर्धन करने का कष्ट करें.)

और अगर आपने वर्ड-वेरीफिकेशन की वैतरणी पार कर टिप्पणी भेज देने पर लम्बी सांस ले भी ली तो कई चिठ्ठों पर मॉडरेशन की स्टिक आपको धवांस देती है. जाओ बेटा, आधे घण्टे बाद आकर चिठ्ठे का स्टैट-काउण्टर फिर बढ़ाना और देखना कि चिठ्ठाधिपति ने आपकी टिप्पणी को कृतार्थ किया या नहीं?

अपने समीर लाल जी या अनामदास जी जैसे लिख्खाड़ चिठ्ठाकार मॉडरेशन करें तो बुरा नहीं लगता. पर नये-नये दुधमुंहे, टिप्पणी के तरसते चिठेरे जब वर्ड-वेरीफिकेशन और मॉडरेशन का जंजाल फैलाते हैं, तो जी जल-भुन जाता है.

वर्डप्रेस और इण्डिपेण्डेण्ट डोमेन वाले ब्लॉग्स पर एक और झमेला है. ब्लॉगस्पॉट के लिये अगर आपके कम्प्यूटर पर गूगल आईडी स्थापित है तो आप दन्न से क्लिक कर टिपेरदें. वर्डप्रेस और इण्डिपेण्डेण्ट डोमेन पर आप को अपना नाम-गांव-गोत्र सब भरना पडता है. तभी आप टिप्पणी प्रेषित कर सकते हैं.

आखिर अपन टिप्पणी करने का धर्म निर्वहन कर रहे हैं कोई बन्धुआ मजदूरी थोड़े ही कर रहे हैं!

मित्रों, इन सब विघ्न-बाधाओं के खिलाफ एक चिठ्ठा सुधार आन्दोलन चलाने की आवश्यकता है? है कोई लीडर?

17 comments:

  1. ज्ञानदत्त जी
    मुझे भी असुविधा होती है, मैं तो अपनी पोस्ट ही वर्ड वेरिफ़िकेशन की मंज़ूरी के बिना छाप नहीं पाता. जी जलता है, मुझे अभी तक तो ठीक दिखता है लेकिन एक एक्सट्रा काम करने का मन नहीं करता. मैं आपका पूरा समर्थन करता हूँ.
    अनामदास

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  2. ठीक कहते हैं परंतु टिप्पणी के स्पैम बॉट्स (स्वचालित प्रोग्राम द्वारा) के लिये कोई भी भाषा बाधक नहीं होती। यह अवश्य है कि वर्ड वेरिफिकेशन से टिप्पणीकार को बाधा तो होती ही है!


    समीर जी, कहीँ आप अत्याधुनिक और बुद्धिमान (AI) युक्त रोबोट तो नहीँ प्रयोग करते हैं, जो कि वर्ड वेरिफिकेशन की बाधा को भी पार करता हुआ फ़टाफ़ट टिपिया देता है ;) पाण्डेय जी को स्पष्टीकरण दिया जाय और अन्य जिज्ञासु लोगों को भी!

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  3. अच्छा लिखा है आपने ! जले पर नमक भी छिड़का है । होता क्या है कि जब इतनी मेहनत कर एक अदद टिप्पणी लिखी होती है तो उसे पोस्ट करके ही दम लेती हूँ । कई बार सोचती हूँ कि याद रखूँ कि कौन वैतरणी पार करने पर ही टिप्पणी को अपने परम पूज्य चिट्ठे पर स्थान देता है और आगे से उन्हें यह कष्ट न दूँ, किन्तु हाय री याददाश्त हर बार धोखा दे जाती है । सो आँखें फोड़ते हुए टिपयाती ही रहती हूँ ।
    घुघूती बासूती

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  4. सच सच, और सच के सिवा कुछ भी नहीं।
    भेजा खराब हो जाता है इस वर्ड वेरीफ़िकेशन के चक्कर में

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  5. अब ज्ञानी ज्ञानदत्त जी इतनी बार नाम ले लिये कि हम शरमा गये. फिर उन्होंने हमारा स्टैंड, भाई अनामदास के साथ जायज भी ठहरा दिया और दोणों को लिख्खाड की उपाधि भी दे डाली, और ज्यादा शरमा गये. अब आये राजीव भाई, वो भी प्रणाम कर गये तो समीर लाल लाल लाल टाईप तो नहीं (हमारे कलर में लाल जब उभरता है तो बैगनीं हो जाता है) बैगनी हो गये.

    एक दिन अब इस प्र स्पष्टीकरण पोस्ट की ही बनती है. इंतजार किया जाये. :)

    ज्ञानदत्त जी, आपका और राजीव भाई का आभार.

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  6. भैया इस चीज से तो हम भी बहुत दुखी हूँ। संजय भाई भी इस पर रोना रो चुके हैं और मैं भी किसी दिन तसल्ली से गरियाऊंगा।

    जो लोग स्पैम की बात करते हैं वो बताएं कि कितने स्पैम आते हैं उनके पास। मेरे चिट्ठे पर आज तक गिनकर एकदो स्पैम आए हैं बस। उन दो स्पैम की खातिर सब को तकलीफ देना कहाँ जायज है। एक दो को डिलीट नहीं कर सकते क्या। हद हो गई। खैर इस पर डिटेल से गरियाऊंगा। फिलहाल ये बता दूँ कि सब बहाने हैं प्रूफ सहित लिखूँगा इस पर।

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  7. राजीव उवाच:
    ...अत्याधुनिक और बुद्धिमान (AI) युक्त रोबोट तो नहीँ प्रयोग करते हैं, जो कि वर्ड वेरिफिकेशन की बाधा को भी पार करता हुआ फ़टाफ़ट टिपिया देता है ;)...

    राजीव जी ये मशीन 1000-2000 रुपल्ली में मिलती है? अपन भी लगा लें. आखिर समीर लाल जी ही क्यों मजे में रहें! (
    पहले लिखते समय एक स्पैलिंग गलत हो गयी थी, सो डिलीट कर फिर लिखा है)

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  8. ये गरियाने की परम्परा अच्छी चला दी भाई.पहले कोई उस बेनाम/अनाम को गरिया रहा था जो कुछ भी टिपिया के भाग जाता था.अब उसे भगाने के लिये कुछ लोगों ने कमर कस ली तो लगे उन कमर कसे लोगों को गरियाने.मेरे विचार से टिप्पणी मोडरेशन तो होना चाहिये लेकिन वर्ड वैरीफिकेशन कुछ ज्यादा ही है यदि मॉडरेशन है तो वैरीफिकेशन की क्या जरूरत.वैसे भी वर्डप्रेस डॉट कॉम में स्पैम रोकने के लिये एक सॉफ्टवेयर लगा है.मेरे चिट्ठे पर अभी तक 30 स्पैम उसने रोके हैं..और जैसे जैसे हिन्दी चिट्ठे हिट होंगे ये स्पैम बड़ेंगे ही.

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  9. ले आओ मशीन....जब काम बन जाये तो बताना जरुर!! :)

    आपके नाम से धमका आये हैं:

    http://mastrama.blogspot.com/2007/05/mein.html

    यहाँ पर. आप भी शीश नवा आयें राजीव भाइ के साथ है. और हमारे ई पंडित को भी मंत्रोच्चार के लिये ले जाना साथ में. हा हा!!!

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  10. आपकी चिंता जायज है! आपने फोटू अच्छा लगाया! केचुआ अमीबा स्पैम का! :)

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  11. दिक्कत सही है शुरु शुरु मे तो मै दुबारा टिपिया गया
    और ये वर्ड वरीफ़िकेशन मुझे तो यही लगता है कि एक तो टिपियाओ और उपर से पट्ठा हमारे अग्रेजी ज्ञान की परिक्षा लेने पर उतारु है की हमे अग्रेजी अक्षरो की पहचान है या नही..?

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  12. संजय बेंगाणीMay 15, 2007 at 12:01 PM

    इस पर हमारे विचार नहीं जानना चाहेंगे.

    http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=144
    यहाँ क्लिक करे. तकनीकी कारण से पोस्ट थोड़ी बिगड़ गई है, मगर यहाँ महत्वपूर्ण बहस हुई थी.

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  13. ब्लॉगर पर बहुत पहले स्वचालित बॉट्स के जरिए वायग्रा जैसे उत्पाद और कामुक साइटों के लिंक स्पैम कमेंट के जरिए आते थे. पहला ऐसा स्पैम पंकज नरूला के चिट्ठे पर आया था उसके बाद तो ऐसा धुँआधार नजारा होता था कि बस क्या कहें.

    पर, तब के बाद से तकनीक की गंगा में बहुत सा पानी बह चुका है.

    गूगल ब्लॉगर अब टिप्पणियों को दाखिल करते समय सेक्यूर लॉगिन मुहैया करता है तथा इसका इंटेलिजेंट वाच सिस्टम स्वचालित पता लगाता रहता है कि कौन स्पैमर है और कौन सही उपयोक्ता. इसीलिए मैंने अपने चिट्ठे में भी कोई सालेक भर से वर्ड वेरिफिकेशन लगा रखा था उसे हटा दिया है. ब्लॉगर में अब स्पैम कमेंट नहीं के बराबर आते हैं. वर्डप्रेस में यदा कदा आ जाता है.

    फिर भी शंकित हों तो वर्ड वेरिफ़िकेशन के बजाए मॉडरेशन उपयुक्त होता है.

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  14. संजय बेंगाणीMay 15, 2007 at 2:36 PM

    लोगो को वियाग्रा से ज्यादा भय अनामी टिप्पणीयों से लगता है.

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  15. ज्ञानदत्त जी सही लिखा। रवी जी की तरह मेरा भी विचार है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन के बजाए मॉडरेशन उपयुक्त होता है।

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  16. मैंने कभी भी चिट्ठे पर टिप्पणियों के लिए कोई अवरोध नहीं रखा, न तो मॉडरेशन और न ही वर्ड वेरीफिकेशन। हालांकि स्पैम खूब आते हैं, लेकिन अकिस्मत उन्हें छानकर अलग कर देता है। अब तक 400 से ऊपर स्पैम छाँटकर अलग किए हैं उसने। अनाम, बेनाम टिप्पणियों का भी सदैव स्वागत रहा है मेरे चिट्ठे पर।

    टिप्पणियाँ चिट्ठाकारी में लोकतंत्र की चेतना का बैरोमीटर होती हैं। कोई चिट्ठाकार उनके साथ कैसा सलूक करता है, इसी से पता चलता है कि उसका लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कितना भरोसा है।

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आपको टिप्पणी करने के लिये अग्रिम धन्यवाद|

हिन्दी या अंग्रेजी में टिप्पणियों का स्वागत है|
--- सादर, ज्ञानदत्त पाण्डेय