Thursday, May 24, 2007

बच्चे चाहियें? विषुवत रेखा के समीप जायें

इकॉनमिस्ट में एक रोचक फिलर है. आपके जगह के लैटीट्यूड और आपकी प्रजनन क्षमता में कोई सीधा संबंध होने का कोई सपाट कारण नजर नहीं आता. पर है!
आपका देश विषुवत रेखा से जितना दूर हैचाहे उत्तर में या दक्षिण में; आपके बच्चे उतने ही कम होंगे.

(चित्र इकॉनमिस्ट के इण्टरनेट संस्करण से हैं)

क्या कारण है? इकॉनमिस्ट का पेज यहाँ से डाउनलोड करें भी करें तो चलेगा.

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और खबर के बाद मैं हिन्दी ब्लॉगरी की दुकान खोलता हूं. हिट-काउण्टर शास्त्र के अनुसार जब तक न्यूज कण्टेण्ट के साथ कल्पना जुड़े, हिन्दी की ब्लॉग पोस्ट चल नहीं सकती. सुकुल जी के अखबार और समीर जी के घोड़ों की जेल से यह प्रमाणित हो गया है

उनकी टक्कर की काल्पनिकता मुझ में नहीं है; पर क्या करें; पापी हिटास (हिट्स पाने की चाह) के लिये कुछ भी करना पड़ेगा...

हां तो निम्न "कल्पना टाइम्स" की खबरों पर नजर दौड़ायें:

यह खबर पता चलते ही जेट एयरवेज और किंगफिशर एयरलाइंस नें इक्वाडोर, कोलम्बिया, साओ टोम एण्ड प्रिंस (कहां है जी?), गैबन, कांगो, उगांडा, कीनिया, सोमालिया और किरीबाती के लिये पैकेज टूर तैयार कर लिये हैं. इन पैकेजों में निसंतान दम्पतियों के लिये ल्यूकरेटिव प्रोपोजल्स होंगे

डी.एल.एफ. ने नोयडा/ गुड़गांव की बजाय इन देशों मे होटल बनाने के लिये शैरेटन के साथ डील कर जमीन एक्वायर करने की पहल कर दी है. इसके चलते डी.एल.एफ. ने भारत में आई.पी.. से शेयर बेचने का मामला फिलहाल पेण्ड कर दिया है. अब शायद कम्पनी सीधे नैसडेक पर लिस्ट हो.

लालू प्रसाद जी ने आई.आई.एम. को एक प्रॉजेक्ट कर पता लगाने को कहा हैं कि पंजाब से तमिलनाडु जोड़ने वाली गाड़ियों में जाने वाले यात्रियों से आने वाले यात्री 0.45% ज्यादा क्यों हैं (हैं क्या?) यह पता लगाया जाये. इसमें ऐसा तो नहीं है कि लोग उत्तर से दक्षिण सपत्नीक बच्चे की चाह में जाते हों और वहां से बच्चे के साथ लौटते हों. ऐसी दशा में बच्चो के साथ लौटने वालों को स्पेशल कंसेशन अगले रेल बजट मे एनाउंस किया जा सकता है. यह फर्टिलिटी-टूरिज्म को बढ़ाव देने की दिशा में एक कदम होगा. भारतीय रेल फॉरेन टूरिस्ट के लिये टूरिज्म कर्पोरेशन के साथ अगले साल नयी दिल्ली से साउथ के लिये फर्टिलिटी-ऑन-व्हील जैसी प्रीमियम ट्रेन भी प्लान कर सकती है.

बस-बस-बस. पापी हिटास के लिये इतनी गप्प बहुत है.लम्बी पोस्ट चौपटस्वामी से कलम उधार मिलने के बाद ही लिखी जा सकती है.

8 comments:

  1. तो आप भी हिटास के चक्कर में लिखने लगे...:-) .

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  2. संजय बेंगाणीMay 24, 2007 at 9:03 AM

    गहन अनवेंषण का विषय ले आयें है.

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  3. यह खबर पता चलते ही तमाम स्कैण्डीनेवियन देशों की सरकारें अपने नागरिकों को बारी-बारी से 'फ़ुल एक्सपेंसेज़ पेड' छुट्टी मनाने के लिए विषुवतरेखीय इलाकों में अनिवार्य रूप से भेजने लगेंगीं .

    ये सरकारें परेशान हैं कि उनकी जनता एक तो शादी नहीं करती और करती भी है तो बच्चे नहीं पैदा करती . उनके लिए यह स्वर्णिम मौका है , ज्ञान की इस सेल का 'बेस्ट बार्गेन' .

    तब तक हम कुछ नए सोहर याद करने का प्रयास करते हैं . ज़रूरत पड़ेगी .

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  4. ग्लोबल वार्मिंग के कारण 'जलवायु परिवर्तन' की त्रासदी से प्रभावित ओड़िशा राज्य अब लगभग विषुवतरेखीय जलवायु जैसा ही बन गया है। रोज दोपहर तक भयंकर धूप/गर्मी/उमस और तीसरे/चौथे प्रहर तेज आँधी, फिर वर्षा। तूफान में अनेक पेड़ों तथा बिजली के खम्भों का उखड़ना। बिजली गायब होना और दूसरे दिन गर्मी और तेज बढ़ना...

    यदि विषुवत् रेखीय जलवायु ही चाहिए तो लोगों को ओड़िशा आने का हार्दिक निमन्त्रण है...

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  5. अगर वाकई ऐसी कुछ संभावना भी है तो मेरे हिसाब से विषुवत रेखा के समीप तत्‍काल नो मैंस लैंड घोषित कर देना चाहिए....

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  6. अच्छी उड़ान है कल्प्नाकी!

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  7. पांडे जी

    ध्यान दिजियेगा-कहीं लालू जी टूरिज्म के चक्कर में विषुवतरेखीय इलाकों का दौरा न बना लें, बिना गये तो उनका यह हाल है!! :)

    बेहतरीन पोस्ट रही..बहुत हिट मिल रहीं हैं. चिट्ठे का एड्रेस कांगो का दे दो..और का तो कुछ मालूम नहीं, हिट्स की टेस्टिंग तो हो ही जायेगी. :)

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  8. विषुवत रेखा से दूर होते हुए हम ठंडे होते जाते हैं। दूसरे शब्दों में विषुवत रेखा के समीप होते हुए हम गरम होते जाते हैं।

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--- सादर, ज्ञानदत्त पाण्डेय