Wednesday, September 12, 2007

घर बैठो; तनख्वाह पाओ!



जाज आटो के 2200 कर्मचारी बैठे ठाले (सीएनएन मनी के अनुसार) अपने रिटायरमेण्ट तक घर बैठेंगे और तनख्वाह पायेंगे. आलोक पुराणिक (अ.ब.) के लिये पक्का मसाला है पोस्ट का. वे कह सकते हैं कि इसमें क्या बात है सरकारी कर्मचारी तो नौकरी शुरू करते से रिटायरमेण्ट के दिन माला पहनने तक बिना काम के तनख्वाह पाता है. पर भैयाजी, उसे झूठी-सच्ची हाजिरी तो लगानी पड़ती है दफ्तर में! बजाज आटो में तो शुद्ध घर बैठे बिना काम के तनख्वाह मिलेगी.

आलोक पुराणिक (स्मा.नि.) और वाह मनी के कमल शर्मा जी बतायें कि बजाज आटो निवेश के लिये बेहतर हुआ है क्या?

बजाज आटो अपने पुराने अकुर्दी (पुणे) के प्लाण्ट में मोटरसाइकल असेम्बली का काम बन्द कर लोगों को घर बैठे तनख्वाह देने का काम कर रहा है. अब यह उत्पादन अन्य इकाइयों में होगा. अकुर्दी में स्पेयर पार्ट बनते रहेंगे. काम बन्द करने का कारण महाराष्ट्र सरकार की केपेसिटी रेशनलाइजेशन को ले कर नीतियों के कष्ट और अन्य राज्यों द्वारा टेक्स और चुंगी के कंशेसन हैं.

जैसा अपेक्षित था, मैरिल्ल लिंच ने बजाज आटो पर खरीद की अनुशंसा की है. उद्धव ठाकरे ने (अगर पुणे में बजाज आटो का प्लाण्ट बन्द हुआ तो) शिव सेना के घूंसे की धमकी दी है. "महाराष्ट्र सरकार और बजाज आटो में ठनी" का समाचर है. उधर बजाज आटो के राजीव बजाज ने कहा है कि वे अकुर्दी का प्लाण्ट बन्द नहीं कर रहे.

खबरें हैं रोचक. और अगर लोग विषय से ट्यून कर पाये तो बहस और भी रोचक हो सकती है. पूंजीवाद-साम्यवाद-समाजवाद-प्रान्तवाद-हेन वाद-तेन वाद... बहुत पेंच बनाये जा सकते हैं इसमें.


कविता करने से छुट्टी तो मिली! बड़ा झमेला है उसमें.
वैसे मैं कह सकता हूं कि समीर लाल जी से मस्त सपोर्ट नहीं मिला(!). तुलसी लिखते हैं न - "मोहे न नारि नारि के रूपा". कवि को दूसरा कवि भला क्यों पसन्द आने लगा. वह भी हमारे जैसा उदीयमान! :) :) :)

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