पर मित्रों कुछ दिन पहले मुझे ईआईडी पैरी (इण्डिया) लिमिटेड की २००७-०८ की वार्षिक रिपोर्ट मिली। मेरे पास उसके कुछ शेयर हैं। इस रिपोर्ट का शीर्षक है - भविष्य के लिये तैयार। और पहले कुछ पन्नों का अनुवाद है-
कोई वर्तमान नहीं है। केवल भूत है या भविष्य। आप चाहे जितना बारीकी से समय को छीलें, या तो वह हो चुका है, या होगा। तब वे लोग जो दावा करते हैं कि वे वर्तमान में जीते हैं, किसमें रहते हैं? भूतकाल उन्हें संज्ञाशून्य कर देता है यह विश्वास करने में कि वह अब भी चल रहा है। और वे उसे वर्तमान कहते हैं। हम ईआईडी पैरी में ऐसा नहीं कहते।
समय उड़ रहा है। भविष्य तेजी से भूतकाल बन रहा है। लोग ऐसा आज कह रहे हैं। ... ईआईडी पैरी में हम इस पर १७८८ से विश्वास करते आये हैं...
अपने भूतकाल की उपलब्धियों पर विश्राम करना सरल है। यह और भी सरल है कि कोसा जाये भविष्य के अंधकार को। पर हम ईआईडी पैरी में सफलता से भविष्य की ओर आगे बढ़ते हैं...
मैं तय नहीं कर पा रहा कि "द पावर ऑफ नाऊ" को वरीयता दूं या ईआईडी पैरी की रिपोर्ट के आकर्षक वाक्यों को!





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आपका उलाहना नाज़ायज़ है, आप यदि सुबह पौने पाँच बजे ही ठेल दें, तो क्या और चार पैंतीस पर ठेलें तो क्या ?
यह तो मेरी चिकित्सीय उत्सुकता थी । यह अब और भी बढ़ गयी है, कल की पोस्ट में आपने दिनचर्या तो माकूल बतायी,
लेकिन यह गोल गये कि आख़िर आप काम कब लगाते हैं ?
लगाते हैं भी या नहीं ? क्या इलाहाबाद में प्रचलन नहीं है ?
कृपया अपनी दिनचर्या में रीता भाभी का भी उल्लेख करें ।
क्या रीता भाभी आपकी दिनचर्या से परे हैं ? क्यों न आपको देवर-चहेते फोरम के सम्मुख पेश किया जाये ?
जीवन में शारीरिक हलचल भी उतना ही आवश्यक है, जितना कि मानसिक हलचल !
क्षमा करें, इसी सनीचर को आकर मिलता हूँ ।
मुझे लगता है कि प्रदूषण फैलाने वाली, अनाप-शनाप मुनाफ़ा बटोरने वाली या फिर आपके धन का धंधा करने वाली कंपनियों के विज्ञापनों/रिपोर्टों में अच्छी-अच्छी बातों की मात्रा औसत से ज़्यादा हुआ करती है.
Alomost like One party calls a GLASS Half Full
of water while the other party calls it half empty.
उत्साह बढाने के लिये, ये सारी घोषणाएँ सही हैँ परँतु,मनुष्य को हर
स्थिती के लिये, अपने आपको तैयार रखना पडता है because life's biggest quality is its unpredictability.
भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों पर ध्यान देना होगा।
मैं भूत से सीखकर, भविष्य की तैयारी के लिए वर्तमान में क्रियाशील रहने की चेष्ठा करता हूँ।
शुभकामनाएं
आप फिलिम नहीं ना देखते, इसलिए आपको पावर आफ नाऊ बहुत धांसू लग रही है।
बरसों पहले एक फिल्म में एक डांसर ने बहुत अच्छे से यह बात समझायी थी
आगे भी जाने ना तू
पीछे भी जाने ना तू
जो भी है, बस यही एक पल है
हिंदी फिल्में देखना शुरु करें, सारा ज्ञान वहीं है।
लाख टकों की एक बात है " मन चंगा तो कठोती में गंगा" बस...बाकि सब लफ्फाजी है. कितनी ही किताबें पढों..बाबाओं से ज्ञान वर्धन करो...कोई फाईदा नहीं होता.
नीरज
वैसे दोनों सही है... बस सोचने का अलग-अलग नजरिया है.
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