एक मेरी बहुत पुरानी फोटो है, बिना टाई की|
मुझे यह याद है कि मैं सिविल सर्विसेज परीक्षा के इण्टरव्यू के लिये जरूर टाई पहन कर गया था। और वह टाई मैने स्वयं बांधी थी – अर्थात टाई बांधना भी मुझे आता था। अब तो शायद बांधना भी भूल गया होऊं।
मेरी पत्नी जी ने कहा कि मैने एक फोटो रेलवे स्टाफ कॉलेज में टाई पहने खिंचवाई थी – लगभग ढ़ाई दशक पहले। मुझे इण्डक्शन कोर्स में गोल्ड मैडल मिला था। किसी बड़े आदमी ने प्रदान किया था। अब वह भी याद नहीं कि वह किसने दिया था। स्मृति धुंधला गयी है। और वह टाई वाली फोटो भी नहीं दीख रही कम्प्यूटर में।
बहुत ग्लेमर लेस जीवन है अपना। मैं यह इस लिये कह रहा हूं क्यों कि कल मैने अखबार में कल खबर पढ़ी थी। इलाहाबाद में एक गगन चुम्बी कमर्शियल इमारत में बम ब्लॉस्ट की अफवाह के बाद उसमें से बाहर निकलते ढ़ेरों टाई पहने नौजवान लड़के लड़कियों की तस्वीर छपी थी उस खबर के साथ – और वे सब ड्रेस और टाई पहने थे। कितने स्मार्ट लग रहे थे। हम तो कभी स्मार्ट रहे ही नहीं जी!
प्लेन-प्लेन सी सादी जिन्दगी। ग्लैमर रहित। बिट्स पिलानी में किसी लड़की ने भाव नहीं दिया। जिन्दगी भी चल रही है; और जो भी शो-पानी है, सो तो पत्नीजी की कृपा से ही है।
पर एक टाई खरीदने – पहनने का मन हो रहा है। कित्ते की आती है टाई; जी!
रीता पाण्डेय की प्री-पब्लिश त्वरित टिप्पणी – क्या कहना चाहते हैं आप? क्या स्मार्ट लगना, रहना गलत है। क्या आप बताना चाहते हैं कि लोगों से अलग आपको केवल मुड़े तुड़े कपड़े चाहियें? उन नौजवानों का काम है, प्रोफेशन है। उसके अनुसार उनकी ड्रेस है। सरलता – सादगी का मतलब दरिद्र दीखना थोड़े ही होता है? अपने पास टाई न होने का नारा क्या दूसरे तरह की स्नॉबरी नहीं है?





36Comments so far:
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I like Ritaji's plain accusation of "reverse snobbery "
that is spoken like a True Wife !1
&
in Hindi i can add,
"नेहले पे दहला "
अच्छी पोस्ट, रोचक चर्चा।
१) तीसरा सेमेस्टर बी. टेक. : जब नये जूनियर्स (फ़च्चों) के लिये रेलवे स्टेशन पर एक काउंटर लगाया था ।
२) छठा सेमेस्टर बी. टेक : जब अपने सीनियर लोगों के विदाई समारोह में हमने मंच का संचालन किया था ।
३) सातवां सेमेस्टर : जब कालेज में सेमिनार दिया था ।
४) फ़रवरी २००४: अपनी बडी बहन की शादी पर, रिश्तेदारों के कहने पर ।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में पूरे दो साल बिना टाई पहनने का मौका मिले निकल गये । यहाँ अमेरिका में भी एक बार शौकिया इंटरव्यू में बैठे थे तो टाई लगायी थी ।
वैसे आज मेरे रूममेट ने एक इंटरव्यू दिया था और कल रात को मैने अपने बक्से से टाई खोजकर, गांठ लगाकर दी थी । गांठ लगाना अभी भी याद है ।
अभी कुछ वर्ष पहले बैंक आफ़ बडौदा ने अपने अधिकारियों को टाई पहनने के निर्देश दिये थे । तो शौक शौक में पिताजी ने हफ़्ते दस दिन टाई लगायी । उसके बाद टाइ उनके आफ़िस की दराज में बैठ गयी और किसी वरिष्ठ अधिकारी के बैक दौरे के समय ही बाहर आती थी :-)
टाई भारत में केवल प्रदर्शनी की वस्तु है। भारतीय वातावरण के लिए तो साधारण महीन वस्त्र ही उपयोगी हैं। टाई तो हमेशा कचोटती सी लगती है। वह चुस्ती के लिए कतई आवश्यक नहीं।
इक वो आलम था कि खुदा को खुदा न कह सका
अब इक ये आलम है कि हर बुत को खुदा कहते हैं
बहरहाल मेरी इस बात को आदरणीय रीता जी का समर्थन मिलेगा और वे आपकी इस आत्म प्रवंचना पर आपके निश्चित ही क्लास लेंगी !
रही बात पढ़ने ओढ़ने की तो जिसे जैसा मन भाये -इक्सेन्ट्रिक कभी कपड़े लत्तों पर ध्यान नही देते -यह दोयम दर्जे लोगों का काम है .पहले तो नही अब मैं भी कोशिश करता हूँ कि स्मार्ट सा दिखूं -यह जीनो का चीत्कार सा लगता है कि भाई मैं अभी चुका नहीं और यह थुल थुल होता शरीर दरअसल अभी भी जीनो का लबादा और तन्वंगिओं को संभाल सकता है -कोई तो झांसे में आए और गुलशन का कारोबार चले ......चलिए कभी इसग्रंथि का विस्तार से विवेचन साईब्लाग पर ......
आपके "वी" गले के हाथ के बुने हुये स्वेटर ने बहुत पुरानी यादों को जाग्रत कर दिया है, साथ ही चश्मे का फ़्रेम और तेल लगे हुये सलीके से कढे हुये बाल बहुत अच्छे लग रहे हैं ।
समझदारी बढ़ी, तो टाई बहूत चिरकुट टाइप की चीज लगी। फिर कभी ना पहनी। अब कभी कभी लगता है कि पहन ही ली जाये, कुछ ऐसा बुरा आइटम भी नहीं है।
वैसे एरोगेंस और टाई अफसरों को अधिक शोभा देती है। सीधा सादा मास्टर लेखक टाइप इस लपेटे में सच्ची का टाई वाला मान लिया जाये, तो प्राबलम हो जायेगी।
ये स्मार्ट युवक मोटी पगार पाने वाले गुलामो से अधिक कुछ नहीं.
आप दाम क्यों पूछ रहे हैं? अगर टाई वाला चित्र ब्लॉग पर लगाना है तो उसके लिए भी खरीदने की कोई जरूरत नहीं. फोटोशॉप की मदद से कहें तो आपके इसी हेंडसम से फोटो को टाई पहना दें, या फ़िर किसी टाई वाले के धड पर आपका सर जोड़ दें. चित्र ही चाहिए तो उसके लिए पैसे खोटे क्यों करने?
और जिन टाई वाले नवजवानों और नवजवानियों का आपने जिक्र किया, उन्हें तो दूर से देख कर ही भय लगता है, कि अभी आकर कोई ऐसी वस्तु बेच जायेंगे जिसकी कोई आवश्यकता दूर-दूर तक नहीं है.
नारायणमूर्ती और अजीम प्रेमजी हाशमी तो हमेशा ही आधी बाँहों की हलके रंग की (अक्सर सफ़ेद) शर्ट में नजर आते हैं, सिवाय तब के जब किसी बड़े सेमीनार में स्पीच दे रहे हों. हमारे आदर्श तो ये हैं.
बार ट्राई की पर बात कुछ बनी नही ! फ़िर कभी समय ही
नही मिला इसके बारे में सोचने का ! और ये जान कर आज
बड़ी प्रशन्नता हुई की आपका बीट्स पिलानी से नाता रहा है !
हमारा बीट्स से तो नही पर पिलानी से गहरा रिश्ता है !
बाकी चीजों जैसे अंग्रेजी बोलना या पश्चिम की नक़ल कर अपने को स्मार्ट सिद्ध करने के फेर जैसा ही यह टाई पहनना भी है.टाई पहनकर ही यदि स्मार्ट बना जा सकता है तो गांधीजी को तो निहायत ही अनस्मार्ट मन जाएगा न.
टाई हमने पहली बार करीब डेढ़ साल पहले अपने पहले इंटरव्यू में ही बाँधी थी. और उसके बाद भी बहुत कम... हाँ बाहर गया तो लगाना पड़ा वो भी कोट के साथ :( मुझे तो मजबूरी लगती है.
पुणे में तो नहीं पर बाकी जगह इनवेस्टमेंट बैंक के ऑफिस में कोट रूम होते हैं जहाँ आप लटका के रख सकते हैं. मैंने वहीँ लटका ही छोड़ा था, कभी-कभी जरुरत महसूस हुई तो पहन लिया.
और बाकी चीजों की तरह टाई के दाम की भी रेंज बड़ी लम्बी चौडी है... एक ही टाई ली थी हमने वही डेढ़ साल पहले वाली करीब ५५० रुपयों की सेंचुरी की, लोग कहते हैं की मैं बड़ी दूकान में ठग लिया गया. एक दिन ऑफिस बांध के जाइए और फोटो लगाइए लोगों से मिलने वाली दृष्टि और कोम्प्लिमेंट्स के साथ.
ऐसे प्रयोग करने चाहिए, बड़ा मजा आता है :-)
:(
अपने पाटिल साहब तो बिना टाई के ही स्मार्ट लगते हैं.
और घोस्ट बस्टर जी से जो बात कहनी है वो है "लटाई को काहे भूल गए जी?"
धन्यवाद
आजकल किसी भी तरह अपनी नई पुरानी फोटो सांटने का मानो फैशन ही आ गया है. जाने कौन ले आया इसे फैशन में. :)
;)
अब घोस्ट बस्टर जी से मुखातिब होता हूं.. अरे सर जी मिठाई कैसे भूल गये?? उससे बड़ी और कोई चीज दुनिया में है क्या? हर खुशी के मौके पर हम सबसे पहले वही बांटते हैं.. और शिव जी भी लटाई कि याद दिला ही गये हैं.. :)
पिछली बार मैंने पिछले साल मार्च में टाई बांधी थी.. ऑफिस में अप्रैल के बाद गर्मी के कारण से टाई कि अनिवार्यता खत्म कर दी गई.. उसके बाद अभी तक लागू नहीं हुई.. वैसे ज्ञान जी, मेरे पास 3 टाई है.. एक मैंने 150 मे ली थी.. दूसरा मित्रों ने गिफ्ट किया था सो दाम का पता नहीं.. तीसरा पिताजी ने अपनी टाई दी थी जिसकी किमत 700+ कुछ थी.. अब आप ही सोच लिजिये कौन वाळी लेनी है.. मगर फोटो जरूर दिखाईयेगा.. :)
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