इलाहाबाद में ब्लॉगिंग पर गोष्ठी हुई। युवा लोगों द्वारा बड़ा ही प्रोफेशनली मैनेज्ड कार्यक्रम। गड़बड़ सिर्फ हम नॉट सो यंग लोगों ने अपने माइक-मोह से की। माइक मोह बहुत गलत टाइप का मोह है। माइक आपको अचानक सर्वज्ञ होने का सम्मोहन करता है। आपको अच्छे भले आदमी को कचरा करवाना है तो उसे एक माइक थमा दें। वह गरीब तो डिरेलमेण्ट के लिये तैयार बैठा है। जो कुछ उसके मन में पका, अधपका ज्ञान है – सब ठेल देगा। ज्यादा वाह वाह कर दी तो एक आध गजल - गीत – भजन भी सुना जायेगा।
Saturday, May 9, 2009
चाय की दुकान पर ब्लॉग-विमर्श
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ब्लॉग लेखन - ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey समय (भारत) 11:21 AM
ब्लॉग लेखन - ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey समय (भारत) 11:21 AM
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34Comments so far:
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I am new to Blogging world. I found the seminar taja hawaain very informative but yes there was some distraction because most of the time was spent in only welcoming and creating environment for the seminar. Dr. Kavita Vachaknavi ji repeated her presentation of Vigyan parishad.
How can I post the comment in Hindi? please help me.
Arun Tiwari
मैं विरोध में बहिर्गमन कर रहा हूँ !
अहा! जिंदगी मैगजीन के ताजा अंक से जानकारी मिली कि कैसे अहमदाबाद के एक युवा ने ऐसे ही फ़्री चाय के कांसेप्ट के आधार पर हफ़्ते में एक दिन लोगों को आमंत्रित कर जन-जागरूकता का अभियान छेड़ा है और इस अभियान को सफलता मिल रही है। यहां तक कि इस अभियान से लोग मुंबई में भी ऐसे ही अभियान शुरु कर चुके हैं।
तो फिर ब्लॉगिंग के लिए भी ऐसा ही फ्री चाय का कांसेप्ट क्यों नहीं आ सकता।
http://www.ahmedabadmirror.com/index.aspx?page=article§id=3&contentid=20090406200904060248137172757e222§xslt=&pageno=1
न अफसर है, न मास्टर और न इलाहाबादी...चलते हैं जी यहाँ से भारी मन से.
तस्वीर में देखकर लगा था कि इस बार तो ट्यूब के जगह बाल्टी भर गई होगी कई दिन के मटेरियल के लिए...कल से जुगाली शुरु होगी क्या??
इलाहाबाद में तो कटरा में लक्ष्मी चौराहा पर ही ज्यादा उठा बैठा हूँ?
ज्यादा औपचारिकतायें होने से मूल विषय भटक जाता है !! फिर माइक का तड़का??
प्राइमरी का मास्टरफतेहपुर
यह ससुरी माईक है ही बड़ी कुत्ती चीज -पूरी तरह सहमत ! और क्या क्या मानसिक हलचल रही ? मेरी तो उपलब्धियां ही उपलब्धियां रहीं ! (ज्ञान ) साहित्य और लालित्य दोनों की जोड़ी -माने आपके साथ ही आदरणीय रीता जी से मुलाकात ! अनूप जी जो शरीफ शरारतों का मानो कोई मौका ही हाथ से नहीं जाने देना चाहते ! सिद्धस्थ सिद्धार्थ का शिष्टाचार और कुशल वक्ता वाचकनवी को सुनना ,इमरान महान की शेरो शायरी -यह सब कया कोई कभी भी भूल सकता है ?
सब कुछ अविस्मर्णीय !
रामराम.
मेरे लिये सबसे खास बात ये रही कि एक महिला जो ब्लागर लग रही थी। उन्होने मुझसे कहा कि तुम अब तक कहाँ थे ? और व्यक्तिगत लघु बात हुई, पर मै उन्हे पहचान नही सका। करीब 2-3 मिनट बाद ने सहृदय से विनम्रता के साथ क्षमा प्राथी हो कर पूछा कि मै आपको पहचान नही पाया तो किसी ने बताया कि मिसेज पांडेय है, फिर थोड़ा और चर्चा हुई। दो बार घर जहाँ हुआ पर उनसे ऐसे ही मिलना तय लिखा था। एक लघु मिलन में उनकी एक अच्छी छवि स्मृति पटल पर बनी हुई है।
garmee mein theek rahgaa..
हाय माइक ने हवा से भर दिया, वरना वह भी आदमी कमज़ोर था.
(स्वर्गीय काका हाथरसी से क्षमा याचना के साथ)
आपने जो स्लाइड आगे सरका दिए उनका मलाल हुआ और ज्यादा क्या कहे बाकी तो सफल आयोजन था जैसा की ब्लॉग्गिंग में भी होता रहा है सुनने वाले कम मिले (शायद मुझे ऐसा लगता है)
मुझे तो बिलकुल भी नहीं लगा की किसी ब्लॉगर द्वारा माइक का अनुचित फायदा उठाया गया
आपसे शिकायत है की आपने जल्दी जल्दी में निपटा दिया
इमरान ने भी अच्छा सञ्चालन किया
जब ब्लॉग्गिंग का परिचय दिया गया तब ये जरूरी था की ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया की भी स्लाइड बना कर दिखाई जाये जिसकी कमी खली
मुख्य अतिथी जी ने जब ब्लोगिंग पर बोलना शुरू किया वो पल यादगार है क्योकि मैंने तो कल्पना नहीं की थी की वो भी एक ब्लॉगर हैं
ऐसा आयोजन बार बार हो इस कामना के साथ
आपका वीनस केसरी
और हाँ अगर आप से मुलाकात का सौभाग्य फिर मिलने का मौका मिले तो उसके लिए कट चाय तो क्या जो आप कहे सब हाजिर करने के लिए तैयार है हम
internet par hindi anuprayog vishay par jab bhi kisi shrotavarg ke samne baat hogi to vahi baat hogi, aisa nahin hai ki aadhe anuprayog ek seminar mein bataye jayein va shesh aadhe doosre kisi karyakram mein.keval ek maien hi nahin koi bhi vakta yadi hindi anuprayog ki vartmaan sthiti par baat karega, to ye sab baat hi aayengi.ab aap use 10 baar sunein ya 1 baar. yah aap ka durbhagya tha ki aap ne ek hi din mein 2 alag alag sansthaon ke karyakram mein ek hi vakta ko suna.
अब कहते हैं कि चाय की दुकान पर ही सही रहती है सब तरह की धाराएं ....यही सही। हम तो उसका लाभ भी नहीं ले पाएंगे। अलबत्ता अपने सैलून में भोपाल की तरफ घूमने निकलिएगा तो बताइएगा...।
मुझे तो कार्यक्रम बहुत मजेदार लगा। एकदम घरेलू टाइप। माइक होता ही है उपयोग के लिये। सदुपयोग करें या दुरुपयोग। आगे अगले महीने इलाहाबाद जाना है तो वहीं किसी चाय की दुकान पर हो जाये जमावड़ा। शिवकुटी में या फ़िर ट्रेजरी के पास की किसी की किसी दुकान में। कर इंतजाम भाई सिद्धार्थ जी!
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