Saturday, June 13, 2009

निरापद लेखन


ट्यूबलाइटीय रेवलेशन:

हिंसक प्रजातियों की बजाय सांप, शेर, कुकुर और बिलार पर लिखना निरापद है और उसमें भी पर्याप्त बौद्धिकता ठेली जा सकती है।

तदानुसार लेखन:

Kabir हजारीप्रसाद द्विवेदी की कबीर पर लिखी पुस्तक ढूंढी जा रही थी। काफी ढूंढने पर पता चला कि गोलू पांड़े एक कोने में बैठे उसका अध्ययन कर रहे हैं। आधे से ज्यादा पढ़ कर आत्मसात कर चुके हैं। जो हिस्सा बचा है उसकी एण्टीक वैल्यू भर है।

गोलू पांड़े को निकट उपलब्ध चप्पल से बल भर पीटा गया। घर में कोई गंड़ासा या बड़ा चाकू नहीं है, अन्यथा उन्हें स्वर्ग पंहुचा दिया जाता। अब चूंकि वे जिन्दा हैं, भय है कि ह्यूमन/एनीमल राइट एक्टिविस्ट सक्रिय न हो जायें। golu newमाननीय अजमल अमीर कसाब कसाई जी के विद्वान वकील ने उन्हें महाकवि वाल्मीकि से तुलनीय (यह लिंक पीडीएफ फाइल का है) बता दिया था। उस आधार पर यह सम्भावना व्यक्त की है कि कसाब रत्नाकर की तरह सुधर कर परिवर्तित हो महाकाव्य लिख सकते हैं। अब गोलू पांड़े कहीं कबीरदास जी की तरह उलटबांसियां न कहने लगें।

खैर, गोलू पांड़े को पीटा मैने नहीं, पत्नीजी ने है (लिहाजा मुकदमा हो तो वे झेलें)। उसके बाद गोलूजी को ब्रेड-दूध का नाश्ता भी मिला है। उसे उन्होने अस्वीकार नहीं किया। अब वे आराम फरमा रहे हैं। उनके हाव भाव से लगता है कि अब भी वे कोई महत्वपूर्ण ग्रन्थ पढ़ सकते हैं।

गोलू पांड़े की अध्ययनशीलता और जिज्ञासा को सलाम!     


36 comments:

  1. सही है. अब बाल्मीकि जी ने महाकाव्य लिखा है. 'लायर' जी ने कसाब जी की तुलना उनसे कर ही दी है तो कहीं ऐसा न हो कि सजा-वजा से माफी दिलाकर उन्हें महाकवि बनवा ही दें. देखेंगे कि कसाब आतंकवाद पर महाकाव्य रच रहे हैं. आतंकवाद पर? नहीं नहीं. शायद अहिंसा पर.

    गोलू पाण्डेय की धुलाई और न की जाय. वे सुधर जायेंगे. अरे जब कसाब के सुधरने के चांस हैं तो गोलू पाण्डेय की गिनती तो जानवरों में होती है. वे तो दो दिन में सुधर जायेंगे.

    और इतना सुधार आ जाएगा कि अगली बार से महावीर प्रसाद द्विवेदी तो क्या वेदप्रकाश शर्मा की भी किताबों को हाथ नहीं लगायेंगे.

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  2. पीट कर दूध पिलाने पर हम मौन रहेंगे. पुस्तक के परखंजे उड़ते देख भयानक दर्द होता है. क्या गुजरी होगी आप पर? सहानुभुति है...

    गोलू को टीनटीन कॉमिक्स दी जाय, पढ़ने को...वरना मोर्चा निकालेंगे :)

    कसाब वाल्मिकी है, सही कहा गया है. और जो मुम्बईकर मारे गए वे रावण के उद्दंड राक्षस थे?

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  3. मुझे लगता है् कि आप भी किताबी किसम के बुद्धिजीवी भर हैं...अरे भाई इतने दिनों से जो किताब सङ रही थी ...आपने तो तवज्जो दी नहीं तो गोलु भैया ही सही..खैर आपने उन्हें पीट पाट कर अच्छा नहीं किया ..भाभी जी को हमारा विरोध दर्ज करवा देना...हम गोलु के साथ है

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  4. बहुत ही रोचक लगा आपका यह पोस्ट ......सही है गोलु से गोलु जी हो सकते है.....सम्भावनाओ से इंकार नही किया जा सकता.

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  5. बचा कर रखिये गोलु पाण्डे से.. अब उसे क्या पता वो कब स्कुल गया.. :)

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  6. गोलू पांडे जी अतुल्य प्रतिभा के धनी हैं. इन्हें हजारी प्रसाद द्विवेदी या कबीर तक सीमित रखना इनकी महान प्रतिभा के साथ अन्याय होगा. कृपणता त्यागिये और कुरियर का खर्च उठाने की हामी भरिये.

    लेकिन फ़िर आपको सावधानी रखनी होगी. इतने भारी दस्तावेज हजम करने के बाद इन्हें अपने प्रति प्रताड़ना के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये किसी एनिमल राइट एक्टिविस्ट की दरकार नहीं रहेगी. अपना ध्यान ये खुद रख लेंगे.

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  7. अगर कसाब सुधर सकता है तो गोलू भी बाबा बन सकता है।मै तो अभी से उनकी शरण मे जा रहा हूं।जय हो गोलू बाबा की।और हां अच्छा किया बता दिया गोलू को आपने नही भाभीजी ने पीटा है,अगर नही बताते तो हम कब से मेनका एण्ड एनिमल लव्हर्स प्रा लि को खबर कर देते।

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  8. अब गोलू ने अपने ढंग से अध्ययन किया है तो बेचारा पिट गया...ऐसा ही होता है जब हम अपने ढंग से अध्ययन करते हैं ;)
    वैसे गोलू को देख कर लगता तो नही की उसके साथ कुछ हुआ है.........कहीं यह राजनिति का असर तो नहीं..?;))

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  9. अब आप उस चप्पल को जिससे गोलू की पिटाई हुई है, जरा गोलू से दूर ही रखिये तो अच्छा वरना अगला नंबर उस चप्पल का ही है जो छिन्न भिन्न होकर कहीं दूर पडा मिलेगा।

    सुना है चप्पल से गोलू की बिरादरी वाले झौंसी ( एक प्रकार की कुत्ता रग्बी) खेलते हैं। एक मुंह में लेकर दौडेगा तो कई अन्य उसके पीछे दौडते हैं :)

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  10. एक पुस्तक के नष्ट हो जाने का कष्ट समझा जा सकता है।

    कसाब सुधर सकता है या नहीं यह प्रश्न तो तब उपस्थित होगा जब अदालत के पास उसे यह अवसर देने का अवसर होगा। कुछ अपराध ऐसे हैं जिन में सुधरने का अवसर देने का अधिकार अदालत को भी नहीं है। कसाब का अपराध तो ऐसा है कि उसे सुधरने का अवसर नहीं मिलेगा।

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  11. अभी से आपके गोलू पांडे जी बड़े विद्वान दिखते है पर सोते बहुत है हा हा हा

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  12. सरासर अन्याय है तो ..नहीं नहीं गोलू जी की खातिरदारी की गयी वो नहीं..उन्हें काव्यग्रंथ जैसे लजीज व्यंजन के बाद दूध ब्रेड दी गयी..सारा टेस्ट खराब कर दिया आपने गोलू जी
    वैसे गलती आपकी ही है गोलू जी को ताऊ की पहली हल करने भेज देते..पहेली न भी हल कर पाटा तो क्या..रामप्यारी की सूरत देख कर हरा भरा तो रहता ..हमारी भी पूरी सहानुभूति गोलू जी के साथ ही है..

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  13. शायद गोलू जी को यह स्मरण हो आया हो कि -पोथी पढि-पढि जग मुआ ,पंडित भया नकोय ... ........

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  14. हजारीप्रसाद द्विवेदीजी को आत्मसात करने की कोशिश में था गोलू, पिट गया। कबीर को आत्मसात करना जोखिम का काम है, कबीर को खतरे का कवि यूं ही नहीं कहा जाता है।

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  15. आज हमको तसल्ली होगई. गोलू पांडे जी मे ताऊ बनने की प्रबल संभावना है. हम थोडे चिंता मुक्त हुये.:) ताऊ बनने से पहले चप्प्ल-स्वागत का अभ्यास नितांत आवश्यक है.

    आजकल आपके चिट्ठे की फ़ीड बहुत देर से आती है. कई बार तो अगले दिन आती है. आज भी अब आई है.

    रामराम.

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  16. अक्सर देखा गया है कि प्रतिभाएं अपने घर में ही उपेक्षित होती हैं....आपने भी गोलू के साथ यही किया...उम्मीद है कि आप गोलू की प्रतिभा का उचित सम्मान करेंगे। कृष्णचंदर का गधा भी तो आखिर अखबार पढ़ता था, फिल्में देखता था, राजनीति पर बहस करता था और सट्टे के नंबर बताता था, फिर आपका गोलू कबीर क्यों नहीं पढ़ सकता?

    उम्मीद है अगली पोस्ट उस पर नहीं, उससे लिखवाने का प्रयास करेंगे...उसे मनाइये :)

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  17. गोलू पांडे की अध्ययनशीलता को प्रणाम:)

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  18. कुकुर पिटाई भी कोई अच्छी बात है ! (निरापद टिपण्णी)

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  19. पुस्तक की दशा बताती है कि गोलू पाण्डे पढ़ उसे करीने से रहे थे । अन्यथा.....

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  20. गोलू की कृपा के बाद भी पुस्तक के कुछ अंश बचे रहे -भाग्यशाली हैं ! कम से कम हजारी प्रसाद द्विवेदी जी क्र्तियों का उपभोग कीट पतंग दीमक न कर स्तन्पोशी जीव ही तो कर रहे हैं -राहत है !

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  21. हर किसी के किताब पढने का तरीका अलग होता है, गोलू को एडवांटेज देने के पहले पता किया जाना चाहिये था कि क्या ये उनका तरीका है ज्ञान पाने का।

    क्या गोलू जी को आपकी लाइब्रेरी की बाकी पुस्तकों तक पहुंचने पर रोक लगाई गई है?

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  22. अच्छा लक्षणा-भरा कटाक्ष है. पसंद आया. बधाई.

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  23. गोलू को नाहक प्रताणित किया गया है। अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य पर हुए विधिक व्याघात से चिन्तातुर मुखाकृति देख वह समाधान ढूंढ़ रहा था। अब उसे क्या मालूम कि वह कौन सी किताब है?

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  24. गोलू ने सही किया जो कबीर को पढ़ा . लेकिन उस पर हुआ अत्याचार मनेका गाँधी तक पहुचाया जायेगा .

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  25. आदरणीय पांडेय जी ,
    बेकार ही गोलू को पिटवा दिया आपने ..उसको सर्व शिक्षा अभियान के हेडक्वार्टर भिजवा देते ...अगले दिन अखबार में उसका फोटो भी कुछ प्रसन्न मुद्रा में बैठे अधिकारीयों के साथ छप जाती ...टी .वी पर कवरेज भी हो जाता सो अलग ...
    हेमंत कुमार

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  26. गोलू बेचारा , अध्ययनशीलता का मारा।

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  27. चलिये "गोलु महाराज " क ये जन्म तो सुधर गया ..कसाब का तो ये और आगे का रास्ता भी सँदिग्ध है -
    - लावण्या

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  28. बड़ी सही इंटेलेक्चुअल ट्रेनिंग मिल रही है गोलू पांडे को. पुस्तक-भोज ऐसा ही चलता रहा तो या तो भक्त कवि हो जायेंगे या फिर हिन्दी में पी एच डी.

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  29. बेचारे गोलू पांडे जी :*(
    बड़ा दुःख हुआ उनकी पिटाई के बारे में जानकार. हम तो उनके साथ हैं, कब कौन कुत्ता बोधिसत्व बन जाये! यह तो पूर्व जन्म के संस्कार हैं जो आपका घर मिला उन्हें, वर्ना कहीं कचरे में बैठे होते.

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  30. गोलू पांडेय जी में बुद्धिजीविता कूट-कूट कर भरी है। इतना सब अच्‍छा-बुरा घटित होन पर भी ब्रेड-दूध रूपी सम्‍मान-पुरस्‍कार का तिरस्‍कार नहीं किया।

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  31. गोलू की अध्ययनशीलता की प्रशंसा की जानी चाहिए. उन्होंने जो भी किया, लगता है उसे आत्मसात कर लिया. आज लोग अध्ययन कम करते हैं और भोंकते अधिक हैं.

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  32. एक बार दानापुर में भगवतगीता सहित चार किताबें मूषकीय जिज्ञासा को अर्पण हो गयी । मूषक पर कम अपने आप पर अधिक क्रोध आया । जले पर नमक डाला गया और टिप्पणी आयी ’बीच बीच में पढ़ते रहते तो चूहों को मौका नहीं मिलता’ । असली भूकम्प तो बाद में आया जब चूहों ने निष्काम भाव से बिना फल की चिन्ता किये घर को ही कुरुक्षेत्र बना दिया ।
    गोलू पांड़े पर दृष्टि रखियेगा, पुस्तकें बिना प्रभाव डाले नहीं पचेंगी । शार्टहैण्ड पिटाई (चप्पल जैसी छोटी वस्तु से) लांगहैण्ड पिटाई (डण्डे जैसी लम्बी वस्तु से) से अधिक आत्मीय होती है क्योंकि उसमें निकटता बनी रहती है । दूध ब्रेड का सेवन करवा कर आपने दिखा दिया कि ऐसे भावनात्मक विषयों में भी गाँधीजी का अनुसरण किया जा सकता है । आपने पाप को दण्डित किया पापी को नहीं ।
    कहीं वकील साहब ’कसाब द वाल्मीकि’ को यह पूछने के लिये पाकिस्तान जाने के लिये तो नहीं कहेंगे कि ’क्या पाकिस्तान भी उनके इस कृत्य के फल में सहभोगी रहेगा कि नहीं’ । हृदय परिवर्तन तो उसके बाद ही होगा न ?

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  33. हिंसक प्रजातियों की बजाय सांप, शेर, कुकुर और बिलार पर लिखना निरापद है और उसमें भी पर्याप्त बौद्धिकता ठेली जा सकती है।


    बौद्धिकता तो लेखक की होती है, ठेली कहीं भी जा सकती है!! ;)



    संजय भाई से सहमति है, किताब की बुरी हालत होते देख वाकई कई प्रकार के इमोशन्स का तेज़ रफ़्तार से आवागमन और प्रस्थान होता है!!

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  34. @ अजीत वडनेरकर
    उम्मीद है अगली पोस्ट उस पर नहीं, उससे लिखवाने का प्रयास करेंगे...उसे मनाइये :)
    ============
    गोलु ने माना नहीं।
    उसकी पिटाई जो हुई।
    मेरी पिटाई नहीं हुई थी।
    सो हम मान गए।
    जी विश्वनाथ

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  35. Golu Pandey se bhi likhwaiye kuch..Ab to unko bhi chaska lag hi gaya hoga..wasie mujhe lagta hai golu pandey jald hi public ki bhaari demand mein aane wale hain....

    rahi baat ajmal kasab ki to kal 'Mumbai mirror' ke ek lensman ne uske against gawahi ke saath saboot pesh kiye hain..suna hai sada muskurane wale 'smiling assasin' unhe dekhkar khud ro rahe the..lekin photos achhi hai..mumbai mirror ki site par dekh len..

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--- सादर, ज्ञानदत्त पाण्डेय