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वर्ग: Dharma, Praveen Pandey, S, Self Development, आत्मविकास, धर्म, प्रवीण पाण्डेय
|| MERI MAANSIK HALCHAL ||
|| मेरी (ज्ञानदत्त पाण्डेय की) मानसिक हलचल ||
मन में बहुत कुछ चलता है। मन है तो मैं हूं| मेरे होने का दस्तावेजी प्रमाण बन रहा है यह ब्लॉग|
उत्सुकता एक कीड़ा है, यदि काटता है तभी बुखार चढ़ता है। कभी कभी इस बुखार से पीड़ित व्यक्ति प्रश्न पूँछ कर अपनी अज्ञानता को प्रदर्शित करने में संकोच नहीं करते हैं। उपहास की दवाई से यह बुखार उतर भी जाता है। यदि आप परिस्थितियों के लिये नये हैं तो बुखार तेजी से चढ़ता है और बहुत देर तक चढ़ा रहता है। यदि आप समझते हैं कि आप पुरोधा हैं तो आपका मन आपकी रक्षा करता है और आपको समझा बुझाकर इस बुखार से बचा लेता है।
यह पोस्ट श्री प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। बच्चों को उत्सुकता दैव प्रदत्त है और उपहार में मिलती है। धीरे धीरे हम बड़े होने लगते हैं और अपने आप को तोपची समझने लगते हैं। यह स्थिति या क्षण हमारे जीवन में ज्ञान और विकास का पूर्णविराम है । उसके बाद हम केवल भावनाओं में बहने लगते हैं। भावनायें भी हाथी के विभिन्न अंगों के अनुभव के जैसी।
मैंने एक नियम बनाया है कि जब भी मैं किसी यात्रा में जाता हूँ, सहयात्रियों से बात कर उनके व्यवसाय के बारे में जानने का प्रयास करता हूँ। अभी पिछले कुछ महीनों में एक शेफ, एक डेन्टिस्ट, एक मेडिकल स्टोर के चेन के स्वामी, एक पुराने बैंक कर्मी और रेस्टॉरेन्ट मालिक से उनके व्यवसायों के बारे में बहुत कुछ जाना। यदि आप सुनने को तैयार है और सही प्रश्न पूछते हैं तो लोग बताने में आनन्द लेते हैं। कई बार शेर को सवा शेर मिला और मुझे भी रेलवे की सुधरती अर्थव्यवस्था पर व्याख्यान देना पड़ा और सफाई व्यवस्था पर लम्बा आख्यान सुनना भी पड़ा। दोनों दशाओं में मैं लाभान्वित हुआ।
यदि आप उत्सुक रहेंगे तो उत्साहित भी रहेंगे। आप उत्साहित रहेंगे तो आपका बुखार औरों को भी होगा। फ्लू फैलेगा पर चेहरे पर कपड़ा कोई नहीं ढकेगा। :-)
केनेषितम् प्रेषितम् मन: (किसने प्रेषित किया मन, किसने दिया प्रथम श्वांस?…) - मुझे प्रश्नोप्निषद (केनोप्निषद) हिन्दू दर्शन के सन्दर्भ में कम, इस सन्दर्भ में बहुत अपील करता है कि सबसे महत्वपूर्ण है प्रश्न कर पाने की क्षमता। ईश्वर सभी प्रश्नों के उत्तर भले न दें, हममें हर दशा में उत्सुकता बनाये रखने और प्रश्न कर पाने की क्षमता रख पाने का वरदान अवश्य दें!
प्रवीण जी की उक्त पोस्ट मुझे इस बात की याद दिला गयी। मैं बहुधा ईश्वर से यह प्रार्थना करता हूं!
हे भगवान! ये धूर्त लॉटरी की ई-मेल वाले हिन्दी में भी चालू हो गये! कल मुझे यह स्पेम-मेल मिला -
प्रिय लकी विजेता,
आपका ई मेल पते पर हमारे 2009 में लॉटरी 500,000.00 डॉलर की राशि का दावा चुना गया है तरक्की मिलती है. अपनी जीत से संपर्क करें लागोस, नाइजीरिया में हमारे एजेंट का दावा है.
संपर्क करें: Rev. मार्गरेट Idahosa (श्रीमती)
ई मेल: livecom @ rev.mrs_idahosa
फोन: +2348036954742
बधाई.
जस्टिन होम्स
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26 महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
'यदि आप उत्सुक रहेंगे तो उत्साहित भी रहेंगे। आप उत्साहित रहेंगे तो आपका बुखार औरों को भी होगा। फ्लू फैलेगा पर चेहरे पर कपड़ा कोई नहीं ढकेगा।'
आपने बहुत सार्थक बात कही है. बिना उत्सुकता के हम कुछ भी तो नही सीख सकते है.
500,000.00 डॉलर की लाटरी के लिये बधाई. मत भूलिए यह राशि स्पेमरों के कारण ही मिली है.
प्रश्न पूछना बडा मुश्किल कार्य है। हमारे डिपार्टमेंट के साप्ताहिक सेमिनार के अन्त में जब कभी कोई सवाल नहीं पूछता है तो आत्मा पे बोझ आता है कि ठीक से सुना होता तो शायद पूछ लेते।
आज आन द रेकार्ड कह रहे हैं, कई बार ऐसा हुआ है कि किसी ने प्रश्न पूछा और हमें लगा कि ये कैसा फ़िजूल का प्रश्न है, लेकिन सामने वाले ने जब उसका उत्तर दिया तो लगा कि प्रश्न गहरा था हम ही समझ नहीं पाये। कई बार पूरा सेमिनार ध्यान से सुनने के बाद भी प्रश्न नहीं सूझता या पूछने में संकोच रहता है।
इसी पर हमारे एक प्रोफ़ेसर का कथन याद आ गया, There are no stupid questions. Only stupid answers I might give.
चलिये इस गुरूवार को होने वाले सेमिनार में हम भी पूरे ध्यान से सुनेंगे और एक प्रश्न पूछने का प्रयास करेंगे।
प्रश्न कर पाने की क्षमता रख पाने का वरदान अवश्य दें! -इसी प्रार्थना में हमेशा जुटे रहते हैं. प्रवीण जी का प्रवचन हमेशा की तरह भाया.
आगे से अगर कभी स्वामी जी लिख दूँ तो उन्हीं के लिए लिखा समझियेगा, सादर :)
कस्मै देवाय हविषा विधेम
आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:
________________________
इतना पैसा पाए हैं - लगता है नाइजीरिया बहुत धनी देश है। वहाँ के निवासी ऐसे ही दन फेंकते रहते हैं। एक चार्टर्ड प्लेन करिए चलते हैं। बटोर कर लाएँगे। ..लॉटरी जीतने की बधाई।
प्रश्न पूंछते थके हम -काश फिर से बच्चे बन जाते !
प्रवीण जी का लेख बहुत सार गर्भित रहा ये उत्सुकता ही है जो हमें हमेशा नया सिखाती है बिना उत्सुकता के तो हम कुछ सीख ही नहीं सकते है उत्सुकता रूपी यह बुखार बहुत बढ़िया है |
प्रश्न जीवित हों, ठीक है बढ़ जाये उत्साह।
मिले आपको लाटरी सुमन हृदय की चाह।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
हमें तो नन्हे नत्तू बाबू की तस्वीर
बहोत पसंद आयी ==
जीते रहो - खुश रहो
और मेरे ब्लॉग पर ,
आपके कई नन्हे दोस्तों की फोटो लगी है , उन्हें भी मिलने आ जाओ :)
प्रवीण भाई , बढिया लिखते हैं --
स्नेहाशिष सह:
- लावण्या
प्रश्न कर पाने के लिये उत्सुक या जिज्ञासु होना जरूरी है । और प्रवीण जी की ये बात भी कि यदि आप उत्सुक होंगे तो उत्साही भी होंगे । छोटू जी की तसवीर हमें भी बहुत भायी ।
बच्चों की तरह प्रश्न पूछने की उत्सुकता वायरल फीवर की तरह फ़ैल कर चिर युवा बने रहने में सबकी मदद करे ....!!
आपने जो 'कृपया इन पोस्टों को भी देखें' गॅजेट लगाया है (लिंक विदिन के अलावा, दूसरा वाला) वो कौन सा है और कहां से पाया जा सकता है. ज्ञानवर्धन करें. बढ़िया लग रहा है.
@ रविरतलामी - कृपया इस पोस्ट का पुच्छल्ला देखें:
LinkWithin की तर्ज पर एक अन्य सज्जन ने सम्बन्धित पोस्ट दिखाने की विजेट बनाई है। इसके थम्बनेल छोटे और बेहतर हैं, पर लगाने की प्रक्रिया जटिल। आप खुराफाती जीव हों तो ट्राई कर लें। मैने तो कर लिया है और नीचे “कृपया इन पोस्टों को भी देखें:” वाली खिड़की में वही है। इस जुगाड़ में कितनी पोस्टें दिखानी हैं, वह भी आप तय कर सकते हैं! और यह लिंकविदिन वाले से ज्यादा जल्दी लोड होता है।
उत्साह हो तभी उत्सुकता जागृत होती है और हम ताउम्र विद्यार्थी रहते हैं.
लॉटरी के लिए बेचारों ने हिन्दी अनुवाद कर भेजा है. अंग्रेजी वाली पर ध्यान नहीं दिया तो वे क्या करते? उन्हे तो बस पैसा देना है इसलिए मेहनत करते है.
आप ने सही कहा उत्साह के विषय में।
यह तो सदा बना रहना चाहिए वर्ना आप गए काम से।बिना उत्साह के तो जीने का मजा ही खतम हो जाता है।
लकी विजेता को जवाब जरूर दे। हमने भी दिया था।बाद मे मस्तमौला नाम के ब्लोग में उस का जिक्र भी किया;))
उपनिषद के सुविचार के लिए धन्यवाद।
टिप के लिए धन्यवाद. लिंक-विदिन जैसे एक दो और अन्य मैंने आजमाए थे, परंतु कुछ-न-कुछ समस्या के चलते उन्हें हटाना पड़ा था. इसे आजमा कर देखता हूं.
मेरे व्यवस्या के लिए तो प्रश्न पूछने की क्षमता का बहुत महत्व है। पहले तो अपने ही मुवक्किल से प्रश्नों के माध्यम से उस की समस्या की तह तक जाना फिर प्रश्नों के माध्यम से ही उस से वे तथ्य जानना जिस से उस की समस्या हल की जा सकती हो। अदालत में गवाहों से प्रश्न पूछ कर आवश्यक तथ्यों को रिकार्ड पर लाना आदि। इस गुण के बिना तो वकील असफल ही हो सकता है।
जस्टिन होम्स का ऐसा ही मेल मुझे भी मिला है। औसतन कम से कम एक मेल तो रोज डिलिट करना ही पड़ता है।
लगता है ज्ञानदत्त पाण्डेय जी को नीले रंग से विशेष प्रेम है/हो गया है ।
पाँच लाख डॉलर की लॉटरी!
दादा आप तो करोड़पति हो गए. देखा हिंदी ब्लॉगिँग के फायदे. हिंदी में न लिखते तो कैसे मिलती यह लॉटरी :-)
बाकी गिरिजेश भाई सही बोले बोत पइसा है नाइजीरिया वालों के पास, कितने दानी हैं बेचारे!
उत्सुकता का बुखार इतना गर्म होता है कि ज्वार डालो तो खिलिए बन जाएं:) नत्तू पाण्डेय को अन्नप्राशन पर बधाई:)
प्रश्न-भावना समझ में
आ गई ,अर्थ-भावना ?
प्रश्न से ज्ञान की परंपरा
समृद्ध होती है अतः इनका
होना जरुरी है |
धन्यवाद...
नत्तू पांडे की तस्वीर के आगे तो सब फीका लगा मुझे. ५००K डॉलर भी :)
नतू पाण्डेय को अन्नप्राशन पर बधाई, प्रशन हम करते नही, लेकिन आप को लाटरी की बहुत बहुत बधाई, कब लेने जा रहे है...
लगभग ७ साल पहले मेरे एक मित्र का फोन रात को १० बजे आया कि वे तुंरत किसी महत्वपूर्ण विषय पर मशवरा करने अपने मित्र के साथ आना चाह रहे हैं ! इतनी रात गए जब वह अपने परम मित्र को, लाटरी निकलने के पत्र के साथ लेकर आये तो मेरी इस सलाह पर कि यह पत्र को रद्दी की टोकरी में फ़ेंकने के लायक है और कुछ नहीं, पर उनका चेहरा फक पड़ गया , बहुत देर में मैं उनके मित्र के कष्ट को शांत कर पाया !
मगर हो सकता है आपका पत्र में असली लाटरी निकली हो ...अतः ५ लाख डालर के लिए शुभकामनायें भाई जी !
beautiful thoughts by Praveen ji and so are gievn under by you.
PS: 'Angrej log' apne kaam-kaaj ke baare mein poochne ka aise bura maante hain jaise koi mahila apni aayu ke prashan ka :)
आप की उत्सुकता ही हमारा उत्साह है ।
फोटो देख कर तो लगा था कि मामला नत्तू पांडे जी से संबंधित है, पर पढने पर पता चला कि ये तो बहुत गंभीर मसला है. वैसे ये आदत मुझे भी है.
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